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जुबीन गर्ग मौत केस: परिवार ने पीएम से की विशेष अदालत, फास्ट-ट्रैक सुनवाई और कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग


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मुंबई | एंटरटेनमेंट डेस्क | RBN News बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बॉर्डर 2’ की रिलीज़ के पहले ही दिन दर्शकों को बड़ा झटका लगा है। देश के कई हिस्सों ...
प्रख्यात असमिया कलाकार और सांस्कृतिक प्रतीक जुबीन गर्ग की सिंगापुर में हुई रहस्यमयी मौत को लेकर उनके परिवार ने अब केंद्र सरकार से निर्णायक हस्तक्षेप की अपील की है।
जुबीन गर्ग के परिजनों ने प्रधानमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए असम में विशेष अदालत के गठन, मुकदमे की तेज सुनवाई और सिंगापुर के साथ सक्रिय कानूनी-कूटनीतिक समन्वय की मांग की है।जुबीन गर्ग का निधन 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में हुआ था।
उनकी असामयिक मृत्यु ने न सिर्फ परिवार को, बल्कि असम और देश-विदेश में फैले उनके करोड़ों प्रशंसकों को गहरे सवालों में डाल दिया।भारत और सिंगापुर—दोनों जगह जांचपरिजनों के अनुसार, घटना के तुरंत बाद सिंगापुर की एजेंसियों ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की, जबकि भारतीय उच्चायोग ने पोस्टमॉर्टम और अन्य औपचारिकताओं में सहयोग किया।
हालात संभलने के बाद असम CID में एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसके बाद राज्य सरकार ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।वरिष्ठ अधिकारियों वाली SIT टीम जांच के सिलसिले में सिंगापुर भी गई।
करीब तीन महीने की पड़ताल के बाद असम पुलिस ने 2,500 पन्नों से अधिक की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें हत्या से जुड़े गंभीर प्रावधान लगाए गए हैं।
इसी दौरान, परिवार की ओर से सिंगापुर के कोरोनर कोर्ट में भी विस्तृत तथ्यात्मक प्रस्तुति दी गई।
इसमें जुबीन गर्ग के अंतिम समय की परिस्थितियों, सुरक्षा इंतज़ामों, मानवीय निर्णयों और आपातकालीन प्रतिक्रिया को लेकर कई अहम सवाल उठाए गए हैं।
केंद्र सरकार से क्या मांग की गईपरिवार ने भारत सरकार से निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह किया है—भारत में विशेष अदालत का गठन, ताकि सुनवाई केंद्रित और समयबद्ध होमुकदमे को फास्ट-ट्रैक पर चलाया जाए, जिससे न्याय में देरी न होआवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ अभियोजकों की नियुक्तिआरोपियों को जमानत न दी जाए, जब तक न्यायिक प्रक्रिया पूरी न होसिंगापुर के साथ कानूनी और कूटनीतिक संवाद को मजबूत किया जाए, ताकि सभी सबूत और निष्कर्ष भारतीय एजेंसियों को उपलब्ध होंपरिवार का कहना है कि किसी भी तरह की क्षेत्राधिकार संबंधी जटिलता सच्चाई सामने आने में बाधा नहीं बननी चाहिए।
असम के लोगों से मिल रहा नैतिक बलपरिजनों ने कहा है कि वे दुख की इस घड़ी में भी न्याय व्यवस्था में विश्वास रखते हैं और अब तक हर कानूनी रास्ता जिम्मेदारी और गरिमा के साथ अपनाया गया है।
उन्होंने असम के लोगों के समर्थन को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताया है।जुबीन गर्ग की मौत का मामला अब एक भावनात्मक और संवेदनशील जनमुद्दा बन चुका है। लोगों की निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
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