नई दिल्ली | आरबीएन न्यूज़
भारत की मेजबानी में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के समापन के एक दिन बाद 85 देशों और तीन अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ‘नई दिल्ली घोषणा’ (New Delhi Declaration) पर हस्ताक्षर किए। इस घोषणा पत्र को व्यापक सहमति दिलाने के लिए समिट के निर्धारित समापन के बाद भी परामर्श जारी रखा गया।
महत्वपूर्ण रूप से, संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन दोनों ने इस दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए, जिसे वैश्विक एआई शासन के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।
सरकार द्वारा जारी बयान के अनुसार, घोषणा पत्र “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के सिद्धांत से प्रेरित है और इस बात पर बल देता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के लाभों को समस्त मानवता के बीच न्यायसंगत रूप से साझा किया जाना चाहिए।
सहमति का मार्ग: गैर-बाध्यकारी ढांचा
घोषणा पत्र लगभग 900 शब्दों का है और इसमें अधिकांश प्रतिबद्धताएं स्वैच्छिक (Voluntary) और गैर-बाध्यकारी (Non-binding) हैं।
जैसा कि 2023 के जी20 शिखर सम्मेलन में देखा गया था, इस दस्तावेज़ में भी बाध्यकारी नियमों की बजाय साझा सिद्धांतों और सहयोगात्मक ढांचे पर जोर दिया गया है।
हालांकि इसमें एआई सुरक्षा (AI Safety) और भरोसे (Trust) का उल्लेख है, लेकिन दस्तावेज़ का मुख्य फोकस ज्ञान-साझाकरण, क्षमता निर्माण और तकनीकी पहुंच के लोकतंत्रीकरण पर है।
एआई का लोकतांत्रिक प्रसार (Democratising AI)
घोषणा पत्र में “Charter for the Democratic Diffusion of AI” नामक एक स्वैच्छिक ढांचा प्रस्तावित किया गया है। इसका उद्देश्य है:
- आधारभूत एआई संसाधनों तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करना
- स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप नवाचार को बढ़ावा देना
- लचीले और सक्षम एआई इकोसिस्टम का निर्माण
- राष्ट्रीय कानूनों और नीतियों का सम्मान करते हुए सहयोग बढ़ाना
इसमें “Global AI Impact Commons” नामक एक स्वैच्छिक पहल की भी घोषणा की गई है। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों में एआई के उपयोग के सफल उदाहरणों को प्रदर्शित करना है, ताकि अन्य सरकारें उनसे सीख सकें और अपनी नीतियों में समावेश कर सकें।
सुरक्षा और विश्वसनीयता पर जोर
घोषणा में कहा गया है कि सुरक्षित, भरोसेमंद और मजबूत एआई प्रणालियों का विकास सामाजिक और आर्थिक लाभों को अधिकतम करने के लिए अनिवार्य है।
दस्तावेज़ में निम्न बिंदुओं पर सहमति व्यक्त की गई:
- एआई से जुड़े संभावित सुरक्षा जोखिमों की बेहतर समझ विकसित करना
- उद्योग-नेतृत्व वाले स्वैच्छिक सुरक्षा उपायों को प्रोत्साहित करना
- तकनीकी समाधान और उपयुक्त नीतिगत ढांचे विकसित करना
- एआई के संपूर्ण जीवनचक्र में सार्वजनिक हित और नवाचार के बीच संतुलन बनाए रखना
हालांकि, इसमें बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय नियमन का प्रस्ताव नहीं है।
मानव पूंजी और कौशल विकास
घोषणा पत्र में मानव संसाधन विकास को प्रमुख स्तंभ के रूप में रेखांकित किया गया है। इसमें कहा गया है कि एआई की पूरी क्षमता प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि व्यक्तियों को प्रासंगिक कौशल से सुसज्जित किया जाए।
इसमें निम्न क्षेत्रों पर जोर दिया गया:
- एआई शिक्षा का विस्तार
- कार्यबल पुनः कौशल (Reskilling) कार्यक्रम
- सार्वजनिक अधिकारियों का प्रशिक्षण
- एआई साक्षरता बढ़ाना
- व्यावसायिक प्रशिक्षण ढांचे का आधुनिकीकरण
घोषणा में एआई आधारित अर्थव्यवस्था के लिए “स्वैच्छिक मार्गदर्शक सिद्धांतों” और कार्यबल विकास के लिए एक “प्लेबुक” का उल्लेख भी किया गया है।
अमेरिका और चीन की भागीदारी का महत्व
अमेरिका और चीन दोनों का इस घोषणा में शामिल होना कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, विशेषकर ऐसे समय में जब उन्नत तकनीकों को लेकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेज है।
हालांकि, यह घोषणा एआई नियमन से जुड़े सभी मतभेदों को समाप्त नहीं करती, लेकिन यह बहुपक्षीय सहयोग की दिशा में एक साझा मंच प्रदान करती है।
आगे की राह
घोषणा की स्वैच्छिक प्रकृति के कारण इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सदस्य देशों पर निर्भर करेगी। सूत्रों के अनुसार, आगामी महीनों में कार्य समूहों और सहयोगी मंचों के माध्यम से इन सिद्धांतों को लागू करने की दिशा में पहल की जा सकती है।
एआई के तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में ‘नई दिल्ली घोषणा’ को समावेशी विकास, तकनीकी सहयोग और जिम्मेदार नवाचार की दिशा में एक बहुपक्षीय प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।





