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‘एल मेन्चो’ की मौत से भारतीय जलक्षेत्र में सक्रिय मेक्सिको–चीन ड्रग नेटवर्क को झटका


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मेक्सिको के कुख्यात ड्रग सरगना Nemesio Ruben Oseguera Cervantes, जिसे ‘एल मेन्चो’ के नाम से जाना जाता था, की सैन्य अभियान में मौत को भारतीय सुरक्षा एजेंसियां एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सक्रिय ट्रांसनेशनल नारकोटिक्स नेटवर्क के लिए बड़ा झटका मान रही हैं।
एल मेन्चो Jalisco New Generation Cartel (CJNG) का प्रमुख था और अमेरिका तथा मेक्सिको में वांछित सूची में शामिल था। उसकी मौत के बाद मेक्सिको के कई राज्यों में हिंसा की खबरें सामने आईं, जिसके चलते विभिन्न देशों ने सुरक्षा परामर्श जारी किए।
भारतीय एजेंसियों के रडार पर एल मेन्चो का नाम तब आया था जब Indian Coast Guard (ICG) ने 25 नवंबर 2024 को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के पास एक मछली पकड़ने वाली ट्रॉलर से करीब 6,000 किलोग्राम मेथामफेटामाइन जब्त की थी। इसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹6,000 करोड़ बताई गई थी।
यह भारतीय समुद्री इतिहास की सबसे बड़ी ड्रग बरामदगियों में से एक मानी गई। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले थे कि इस खेप के पीछे CJNG के नेटवर्क का हाथ हो सकता है, जो कथित तौर पर Tse Chi Lop उर्फ “चीनी एल चापो” से जुड़े एशिया-प्रशांत नेटवर्क के साथ समन्वय में काम कर रहा था।
खुफिया आकलनों के अनुसार, यह नेटवर्क मेक्सिको, चीन और म्यांमार सहित कई देशों में फैला हुआ था। अंडमान सागर को कथित तौर पर एक ट्रांजिट कॉरिडोर की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था—जहां से खेप भारत के अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों, जैसे थाईलैंड, तक पहुंचाई जाती थी।
अधिकारियों का कहना है कि 2024 में जब्त मेथामफेटामाइन की शुद्धता उच्च स्तर की थी, जो बड़े अंतरराष्ट्रीय सप्लायरों की संलिप्तता की ओर इशारा करती है।
भारतीय एजेंसियां लंबे समय से अंडरवर्ल्ड सरगना Dawood Ibrahim से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई करती रही हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय कार्टेलों की भारतीय जलक्षेत्र में सक्रियता बढ़ने के संकेत मिले हैं।
अधिकारियों के अनुसार, 2019 से ही अंडमान सागर में विदेशी तत्वों की गतिविधियों के संकेत मिल रहे थे। कुछ मामलों में म्यांमार के नागरिकों का इस्तेमाल समुद्री तस्करी के लिए किया गया।
सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि एल मेन्चो की मौत से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सक्रिय कुछ समन्वित नेटवर्क की गतिविधियां अस्थायी रूप से धीमी पड़ सकती हैं। हालांकि, एजेंसियां यह भी मानती हैं कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल अक्सर नेतृत्व परिवर्तन के बाद भी नए ढांचे में खुद को पुनर्गठित कर लेते हैं।
भारत ने हाल के वर्षों में समुद्री निगरानी, खुफिया समन्वय और तटीय सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया है। अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में गश्त और तकनीकी निगरानी बढ़ाई गई है।
एजेंसियों का फोकस केवल किसी एक सरगना की समाप्ति पर निर्भर नहीं है, बल्कि पूरे सप्लाई चेन और वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने पर है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग, समुद्री सुरक्षा और बहु-एजेंसी समन्वय को आगे और मजबूत किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
एल मेन्चो की मौत को भारतीय जलक्षेत्र में सक्रिय कथित मेक्सिको–चीन ड्रग नेटवर्क के लिए एक सामरिक झटका माना जा रहा है, लेकिन जांच और निगरानी की प्रक्रिया जारी है।
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