नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को कहा कि भारत एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुए यूथ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के पीछे “गहरी साजिश” के ठोस प्रमाण मिले हैं। यह अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम 20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित Bharat Mandapam में आयोजित किया गया था।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विशेष आयुक्त (क्राइम, पुलिस मैनेजमेंट एवं मीडिया सेल) देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि यह घटना एक पूर्वनियोजित प्रयास था, जिसका उद्देश्य सुरक्षा घेरा तोड़कर कार्यक्रम में व्यवधान डालना था।
क्या हुआ था 20 फरवरी को?
पुलिस के अनुसार:
- 20 फरवरी को एआई समिट के दौरान हॉल नंबर 5 में कुछ कार्यकर्ता अचानक खड़े हो गए।
- उन्होंने अपनी शर्ट उतारकर अंदर पहनी टी-शर्ट दिखाई, जिन पर सरकार और भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के खिलाफ नारे लिखे थे।
- एक टी-शर्ट पर “Compromised PM” जैसा नारा भी लिखा था।
- सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप कर प्रदर्शनकारियों को बाहर निकाला।
- इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को हल्की चोटें आईं।
पुलिस का दावा है कि यह विरोध स्वतःस्फूर्त नहीं था, बल्कि सुनियोजित ढंग से अंजाम दिया गया।
किन धाराओं में मामला दर्ज?
जांच के दौरान पुलिस ने Bharatiya Nyaya Sanhita (बीएनएस) की निम्न धाराएँ लगाई हैं:
- धारा 191(1)
- धारा 192
पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच में यह स्पष्ट संकेत मिले हैं कि यह कृत्य साजिश के तहत किया गया था और इसके समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य जुटाए गए हैं।
उदय भानु चिब को बताया मास्टरमाइंड
दिल्ली पुलिस ने Uday Bhanu Chib, भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष, को इस प्रदर्शन का कथित मास्टरमाइंड बताया है।
चिब सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। अदालत ने चिब को पुलिस हिरासत में भेजा है, ताकि उनसे पूछताछ की जा सके।
पुलिस का दावा है:
- प्रदर्शन की योजना पहले से बनाई गई थी।
- अंतरराष्ट्रीय मंच को जानबूझकर चुना गया।
- कई स्तरों पर समन्वय किया गया।
बचाव पक्ष का तर्क
उदय भानु चिब के वकील अधिवक्ता सुजॉय घोष ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने अदालत में कहा:
- एफआईआर की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई।
- मामला केवल टी-शर्ट पर लिखे नारों से जुड़ा है।
- विपक्षी युवा संगठन के अध्यक्ष को हिरासत में भेजना देश की लोकतांत्रिक छवि को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने तर्क दिया कि केवल नारे लिखी टी-शर्ट के आधार पर कठोर कार्रवाई उचित नहीं है।
सुरक्षा बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
यह मामला अब एक व्यापक बहस का विषय बन गया है:
- क्या यह लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार था?
- या अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में सुरक्षा उल्लंघन?
- क्या साजिश का आरोप उचित है?
भारत एआई इम्पैक्ट समिट में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी के कारण सुरक्षा प्रबंध अत्यंत कड़े थे। ऐसे में पुलिस का कहना है कि किसी भी प्रकार का व्यवधान गंभीर सुरक्षा मुद्दा माना जाएगा।
जांच की दिशा
पुलिस ने बताया कि:
- सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।
- डिजिटल संचार रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
- अन्य संभावित शामिल व्यक्तियों की पहचान की जा रही है।
आगे और गिरफ्तारियाँ भी हो सकती हैं।
निष्कर्ष
दिल्ली पुलिस द्वारा “गहरी साजिश” के दावे ने इस विरोध प्रदर्शन को एक बड़े कानूनी और राजनीतिक मुद्दे में बदल दिया है।
जहां पुलिस इसे सुरक्षा उल्लंघन और पूर्वनियोजित कार्रवाई बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहा है।
आने वाले दिनों में न्यायिक प्रक्रिया और आगे की जांच इस मामले की दिशा तय करेगी।





