नई दिल्ली | आरबीएन न्यूज़
पाकिस्तान के हवाई हमलों के बाद अफगानिस्तान की चेतावनी, कम से कम 17 की मौत; उचित जवाब देने की बात


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पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के सीमावर्ती प्रांतों में किए गए हवाई हमलों के बाद काबुल ने “मापी हुई और उचित प्रतिक्रिया” देने की चेतावनी दी है। अफगान अधिकारियों के अनुसार, हमलों में कम से कम 17 लोगों की मौत हुई है और छह अन्य लापता हैं, जिनके मलबे में दबे होने की आशंका है।
पाकिस्तान की सेना ने रविवार तड़के हवाई कार्रवाई करते हुए उन ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया, जिन्हें उसने हालिया आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार समूहों के “कैंप और ठिकाने” बताया।
पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बयान में कहा कि सेना ने “इंटेलिजेंस आधारित, चयनात्मक कार्रवाई” करते हुए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और उसके सहयोगी संगठनों के सात ठिकानों को निशाना बनाया।
बयान में यह भी कहा गया कि इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) से जुड़े तत्वों को भी निशाना बनाया गया, जिसने इस माह इस्लामाबाद में हुए आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी ली थी।
इस्लामाबाद का आरोप है कि हाल के हमलों की साजिश और संचालन अफगानिस्तान में बैठे नेतृत्व के निर्देश पर किया गया।
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने इन हमलों की निंदा करते हुए कहा कि नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में धार्मिक विद्यालय और आवासीय घर प्रभावित हुए हैं। मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और पड़ोसी देशों के बीच अच्छे संबंधों के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया।
“हम पाकिस्तानी सेना को नागरिकों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं। इन हमलों का उचित और मापी हुई प्रतिक्रिया दी जाएगी,” मंत्रालय ने कहा।
ये हमले ऐसे समय में हुए हैं जब पाकिस्तान में हाल के दिनों में कई आत्मघाती हमले हुए हैं।
पाकिस्तान का कहना है कि इन हमलों की योजना और प्रशिक्षण अफगानिस्तान में हुआ।
पाकिस्तान ने 2020 के दोहा समझौते का हवाला देते हुए कहा है कि अफगान भूमि का उपयोग किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं होना चाहिए। इस्लामाबाद ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तालिबान प्रशासन पर दबाव बनाने की अपील की है।
अफगान तालिबान सरकार ने लगातार इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि वह किसी भी विरोधी समूह को शरण नहीं देती।
अक्टूबर में कतर की मध्यस्थता से हुए संघर्षविराम के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कुछ हद तक कम हुआ था। हालांकि, इस्तांबुल में हुई वार्ताएं किसी औपचारिक समझौते तक नहीं पहुंच सकीं।
विश्लेषकों का मानना है कि ताजा हवाई हमले सीमा पर फिर से सैन्य टकराव की आशंका बढ़ा सकते हैं।
अफगानिस्तान की ओर से “उचित प्रतिक्रिया” की चेतावनी ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
फिलहाल स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और दोनों पक्षों के आगे के कदमों पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर है।
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